Popular searches
उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत, चल संपत्ति की रिपोर्टिंग के नियम बदले

Table of Contents
अब दो महीने के मूल वेतन से अधिक कीमत की चल संपत्ति खरीदने या बेचने पर एक माह के भीतर देनी होगी सूचना, आचरण नियमावली में कई अन्य प्रावधानों में भी संशोधन देहरादून। उत्तराखंड शासन ने राज्य के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आचरण नियमावली में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण नियमावली, 2026 में बदलाव को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है। संशोधन के बाद चल संपत्ति की खरीद-बिक्री की सूचना देने की सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे कर्मचारियों को रोजमर्रा की वस्तुओं के लेन-देन में होने वाली अनावश्यक कागजी कार्रवाई से राहत मिलेगी। दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य पर देनी होगी सूचना संशोधित नियमों के तहत अब किसी सरकारी कर्मचारी को दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की चल संपत्ति खरीदने या बेचने पर इसकी सूचना अपने नियुक्ति प्राधिकारी या संबंधित सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी। यह सूचना लेन-देन के एक महीने के भीतर देना अनिवार्य होगा। यह प्रावधान आचरण नियमावली के नियम 22(2) में संशोधन के बाद लागू किया गया है। पांच हजार रुपये की पुरानी सीमा में बदलाव पुराने नियमों के तहत सरकारी कर्मचारी को एक महीने के वेतन या 5,000 रुपये, जो भी कम हो, से अधिक मूल्य की चल संपत्ति के लेन-देन की सूचना विभाग को देनी पड़ती थी। इसमें मोबाइल, लैपटॉप, टीवी और अन्य घरेलू सामान जैसी वस्तुएं भी शामिल हो सकती थीं। महंगाई और वेतनमान में बदलाव के बीच इस सीमा को अव्यावहारिक बताते हुए कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया था। अब रिपोर्टिंग की सीमा बढ़ाकर दो महीने के मूल वेतन से अधिक कर दी गई है। सरकार से कारोबार करने वालों के साथ लेन-देन पर पूर्व अनुमति संशोधित नियमावली में सरकार के साथ वित्तीय या प्रशासनिक संबंध रखने वाले व्यक्तियों, फर्मों, कंपनियों और ठेकेदारों की परिभाषा भी स्पष्ट की गई है। इसमें संविदा, निविदा, आपूर्ति और लाइसेंस से जुड़े मामलों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल पक्षों को शामिल किया गया है। ऐसे व्यक्ति के साथ यदि कोई सरकारी कर्मचारी चल या अचल संपत्ति का लेन-देन करता है, तो उसे पहले संबंधित प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी। संपत्ति का विवरण देने के नियम भी बरकरार नियमावली के तहत समूह क, ख और ग के कर्मचारियों को हर साल अपनी संपत्ति का विवरण देना होगा, जबकि समूह घ के कर्मचारियों के लिए पांच साल में एक बार संपत्ति का ब्योरा देने का प्रावधान है। इसके अलावा, सरकारी कर्मचारी अपनी पत्नी या आश्रित रिश्तेदार को उस जिले में बीमा एजेंट के रूप में काम करने की अनुमति नहीं दे सकता, जहां उसकी स्वयं तैनाती है। कार्मिक विभाग की ओर से जारी संशोधन का उद्देश्य कर्मचारी आचरण से जुड़े प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक बनाना और अनावश्यक रिपोर्टिंग का बोझ कम करना है। हालांकि, सरकार से जुड़े व्यक्तियों के साथ संपत्ति के लेन-देन और संपत्ति विवरण जैसे मामलों में निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा।

Chhuyaaltvnews.com

Contributor

No bio available.

Comments

0

Newsletter

Stories worth your inbox

Get the best articles on SEO, tech, and more — delivered to your inbox. No noise, just signal.