देहरादून: चुनाव आयोग में SIR को लेकर सामने आए विवाद के बीच शुक्रवार को कांग्रेस ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उन्हें पद से हटाने की मांग को लेकर राज्य और जिला स्तर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था।
इसी कड़ी में देहरादून में उत्तराखंड कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय कूच किया। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में कार्यकर्ता PCC मुख्यालय से राज्य सचिवालय स्थित चुनाव कार्यालय की ओर बढ़े। कांग्रेस कार्यकर्ता चुनाव कार्यालय का घेराव करना चाहते थे। हालांकि, सचिवालय से पहले पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई।
प्रदर्शन में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा और कई विधायक व कांग्रेस नेता भी शामिल रहे। कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।

आखिर क्या है पूरा SIR विवाद?
पूरा मामला SIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण) से जुड़ा है। SIR के तहत मतदाता सूची की जांच और उसमें आवश्यक बदलाव किए जाते हैं।
विवाद तब बढ़ा जब The Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के तीन सदस्यों में से दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी - ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में Form 6, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, चुनावी डेटा तक पहुंच और चुनाव से जुड़े सॉफ्टवेयर जैसे मुद्दे शामिल थे। कुछ मामलों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर कहा कि कुछ फैसले या आदेश उनकी जानकारी के बिना लिए गए।
यही रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज कर दी।
राहुल गांधी और कांग्रेस का क्या कहना है?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से जुड़े इन आरोपों को लेकर पहले से ही चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाया है। इस मामले पर उन्होंने चुनाव आयोग, BJP और RSS पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस मामले में न्याय मिलेगा।
कांग्रेस का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है और SIR से जुड़े पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी की है।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा है। आयोग के अनुसार, चुनाव आयुक्तों के बीच चर्चा या अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा है कि पिछले एक वर्ष में उसके सभी आदेश पूरे आयोग की सर्वसम्मत सहमति से लिए गए हैं।
इसलिए फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि चुनाव आयोग के भीतर SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर वास्तव में क्या आपत्तियां दर्ज की गईं, उन आपत्तियों का क्या निपटारा हुआ और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया किस तरह चली।
देहरादून में प्रदर्शन क्यों अहम है?

देहरादून का प्रदर्शन कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा था। पार्टी ने 25 सितंबर को राज्य स्तर पर चुनाव कार्यालयों तक मार्च का कार्यक्रम रखा था। इसके बाद 28 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटियों द्वारा जिला कलेक्टर कार्यालयों तक प्रदर्शन करने का कार्यक्रम भी घोषित किया गया है।
उत्तराखंड में शुक्रवार का प्रदर्शन इसी अभियान का हिस्सा रहा, जिसमें प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठाते हुए CEC के इस्तीफे की मांग की।
यानी, देहरादून से शुरू हुआ यह विरोध केवल स्थानीय प्रदर्शन नहीं था, बल्कि SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस के देशव्यापी आंदोलन का हिस्सा था।
आगे क्या होगा?
SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता होनी चाहिए, जबकि चुनाव आयोग ने अपने फैसलों और प्रक्रिया को लेकर अलग पक्ष रखा है।
देहरादून में हुए प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी मांग को मजबूती से उठाया है। अब देखना होगा कि SIR को लेकर उठे सवालों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और चुनाव आयोग इस पूरे विवाद पर क्या कदम उठाता है।
फिलहाल, यह मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों को भी सामने ला रहा है।
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